जैसलमेर जा कर आपको कुछ अलग ही अनुभव होगा क्योकि ये सभी शहरो से अलग है और आपको चारो तरफ मरुस्थल देखकर बेहतरीन फीलिंग आने वाली है.
आज इस लेख में हम आपको जैसलमेर के कुछ बेस्ट डेस्टिनेशन के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आप घूमने के साथ-साथ जैसलमेर की संस्कृति से भी रूबरू हो सकते हैं।
जैसलमेर का किला- (Jaisalmer fort )
यह दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तानी किलो में से एक है जो राजस्थान का दूसरा सबसे पुराना फोर्ट भी है। जैसलमेर फोर्ट दुनिया का सबसे पुराना एकमात्र लिविंग फोर्ट है अर्थात एक फोर्ट या किला जहां राजा का महल, शॉप्स, गलियां, म्यूज़ियम, हवेलियां, मंदिर सभी एक साथ मौजूद हो। जैसलमेर फोर्ट दुनिया का एकमात्र फोर्ट है जिसकी छत लकड़ी से बनी हुई है और दीवारों पर गोमूत्र का लेप किया गया है। PC: Google Image
अमर सागर झील- ( Amar Sagar Lake )
अमूमन आपने कई लेखों में गडीसर झील का ही नाम सुना होगा लेकिन, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमर सागर झील भी जैसलमेर के लिए एक लोकप्रिय रमणिक स्थान है। इस झील के पास अमर सिंह पैलेस भी जहां आप घूमने के लिए जा सकते हैं। कहा जाता है कि इस झील के सीढियों पर बड़ी ही खूबसूरती से जानवरों के चित्र उरेके गए हैं जो देखते ही बनता है।PC: Google Image
गडीसर झील- ( Gadisar Lake )
इस झील का निर्माण रावल जैसल ने जैसलमेर में पानी के स्त्रोत को निर्मित करने के लिए किया था और बाद में सन 1367 में महारावल गडसी ने इस झील का पुनर्निर्माण करवाया था। यह जैसलमेर में कभी न सूखने वाली जिलों में से एक है। इस झील को वर्तमान में वर्षा के पानी के अलावा इंदिरा गांधी नहर से भी भरा जाता है। यहां का मुख्य पर्यटक आकर्षण है बोटिंग और फोटोग्राफी है। PC: Google Image
पटवों की हवेली- ( Patwaon ki haweli )
ईजैसलमेर शहर के मध्य में छोटी-छोटी गलियों के बीच में स्थित इस हवेली का आर्किटेक्चर बहुत दर्शनीय है। इसे 19वीं शताब्दी में एक अमीर व्यापारी ने बनवाया था तथा यह हवेली पांच अलग-अलग हवेलियों का एक समूह है। पटवों की हवेली अपने खूबसूरत इंटीरियर, सुंदर खिड़कियों, दर्शनीय बालकनी, रॉयल फर्नीचर, अंदर रखी पेंटिंग्स सोने चांदी के आभूषण तथा अद्भुत कलाकृतियों के कारण मशहूर है। PC: Google Image
नाथमल जी की हवेली- ( Nathmal ki haweli )
जैसलमेर में अगर हवेली की बात होती है तो सबसे पहले नथमल की हवेली का जिक्र होता है। मध्यकालीन वास्तुकला द्वारा निर्मित ये हवेली आज भी देसी और विदेशी सैलानियों के लिए प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक है। इस हवेली के स्तंभों और दीवारों पर आपको आज भी घोड़े, मवेशी और वनस्पति का चित्रण आपको देखने को मिल जायेगा। अगर आप इतिहास में रूचि रखते हैं तो इस महल को देखने और घूमने के बाद यकीनन आपके सामने मध्यकालीन भारत दिखाई देना लगेगा ! PC: Google Image
सलीम सिंह की हवेली या मोती महल- ( Salim Singh ki haweli )
बड़ा बाग- ( Bada bagh )
बड़ा बाग जैसलमेर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां पर विशाल गार्डन तथा एक बांध भी है इसके अलावा चारों और आम के पेड़ है। यहां देखने लायक महाराजाओं की छतरियां हैं। यह जगह अपने सनसेट व्यू और फोटोग्राफी के लिए मशहूर है तथा यहां पर कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है जैसे कच्चे धागे, हम दिल दे चुके सनम और नन्हे जैसलमेर। PC: Google Image
सैम सैंड ड्यूंस– ( Sam sand Dunes )
जैसलमेर शहर के पश्चिम में 25 किलोमीटर की दूरी पर सैम नाम के गांव में रेत के टीले स्थित है जो थार के मरुस्थल को एक्सप्लोर करने के लिए सबसे अच्छी जगह है। यहां पर आप ऊंट की सवारी, जीप सफारी पैराग्लाइडिंग, सनसेट और सनराइज के सुंदर नजारे और quad biking कर सकते है। अगर आप यहां पर आते हैं तो आपको एक रात बिताना ही चाहिए। यहां रात को आप कैंपिंग के साथ कल्चरल इवनिंग, ओपन एयर कल्चरल शो, राजस्थानी Folk डांस और सिंगिंग का आनंद ले सकते है।
कुलधारा गांव- ( Kuldhara villege )
कुलधरा भारत के राजस्थान राज्य के जैसलमेर जिले मे स्थित एक गांव है। जो कई सालों से वीरान पड़ा है। कुलधरा गांव वीरान होने के पीछे एक रहस्यमई कहानी है। इतिहासकारों के अनुसार कहा जाता है कुलधरा गांव पालीवाल ब्राह्मणों का गांव हुआ करता था। इस गांव के आसपास कुल 84 गांव हुआ करते थे जिसमें ब्राह्मण जाति के लोग रहते थे। कहा जाता है कि यह गांव अब रूहानी ताकतों के कब्जे में है। यहां आस पास के लोगो का कहना है कि कुलधरा गांव में आज भी रहस्यमी ताकते अपनी मौजूदगी का अहसास जरूर कराती हैं। कहा जाता है यहां पर रहने वाले पालीवाल ब्राह्मणों की आहट आज भी सुनाई देती है। यहां पर आने वाले पर्यटकों का कहना है उन्हें यहां हरपल ऐसा अनुभव होता है कि कोई आसपास चल रहा है। बाजार के चहल-पहल की आवाजें आती हैं। महिलाओं के आपस मे बात करने और उनकी पायलों और चूड़ियों की आवाजे हमेशा ही आती रहती है। सरकार ने इस गांव की सीमा पर एक फाटक बनवा दिया है जिसके पार दिन में तो पर्यटक घूमने आते रहते हैं लेकिन रात में इस फाटक को पार करने की कोई हिम्मत नहीं करता है।
जैसलमेर युद्ध संग्रहालय- (Jaisalmer war museum )
अगर आपको वीर सैनिकों की अमरगाथा देखनी हो तो जैसलमेर वार म्यूजियम पहुंच जाएं। वर्ष 1971 में भारत और पाकिस्तान युद्ध में शहीद सैनिकों को सम्मानित करने के लिए साल 2015 जैसलमेर वार म्यूजियम की स्थापना गई थी। कहा जाता है कि आज भी इस म्यूजियम में वर्ष 1971 ‘लोंगेवाला की लड़ाई’ को ऑडियो-विजुअल रूप में सैलानियों को दिखाई जाती है।
डेजर्ट नेशनल पार्क- ( Desert national park )
क्यूं, नाम सुन के थोड़ा सा आपको अजीब लगा ना, कि भला रेगिस्तान भी पार्क हो सकता है। जी, हां जैसलमेर डेजर्ट नेशनल पार्क बेहद ही बड़ा है। यहां आप कैमल सवारी के साथ जीप सफारी का भी मज़ा उठा सकते हैं। इस पार्क में आपको कई दुर्लभ पक्षी और जानवर भी देखने को मिल जायेंगे। सफर को एक अलग और रोमांच बनाने के लिए ये जगह आपके लिए बेस्ट हो सकता है। PC: Google Image
इंडो पाक बोर्डर (लोंगेवाला पोस्ट और तनोट माता मंदिर)- (Indo-Pak border : Tanot Mata tample )
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